फोरेंसिक मेडिसिन और विष विज्ञान
परिचय
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), बिलासपुर का फोरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग वर्ष 2021 में स्थापित किया गया था। यह विभाग संस्थान के अकादमिक ब्लॉक की चौथी मंजिल पर स्थित है। स्थापना के बाद से ही विभाग शैक्षणिक उत्कृष्टता, नैतिक चिकित्सा पद्धतियों तथा क्षेत्र में विश्वसनीय मेडिको-लीगल सेवाओं के प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
यह विभाग दक्षता-आधारित पाठ्यक्रम के माध्यम से स्नातक चिकित्सा शिक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। व्यावहारिक प्रशिक्षण, केस-आधारित चर्चाएं, प्रदर्शन तथा आधुनिक शिक्षण विधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया जाता है। विभाग शिक्षण मॉडलों, संग्रहालय नमूनों, चार्टों एवं अन्य शिक्षण सामग्रियों से सुसज्जित है, जो विद्यार्थियों को जटिल मेडिको-लीगल अवधारणाओं को समझने में सहायता प्रदान करते हैं तथा उनमें वैज्ञानिक सोच एवं रचनात्मकता का विकास करते हैं।
विभाग में अनुसंधान एवं शैक्षणिक गतिविधियों पर विशेष बल दिया जाता है। फोरेंसिक पैथोलॉजी, टॉक्सिकोलॉजी तथा अनुप्रयुक्त फोरेंसिक विज्ञान के क्षेत्रों में वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करने हेतु अनुकूल शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया गया है। संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी विभिन्न शोध परियोजनाओं में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं, जिनका उद्देश्य मेडिको-लीगल प्रथाओं में सुधार करना तथा शैक्षणिक साहित्य में सार्थक योगदान देना है।
विभाग समुदाय को समर्पित मेडिको-लीगल सेवाएं प्रदान करता है, विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए। यह दूरस्थ, जनजातीय एवं वंचित आबादी की स्वास्थ्य एवं फोरेंसिक आवश्यकताओं की पूर्ति करता है। क्षेत्र की विशिष्ट भौगोलिक चुनौतियों तथा आघात (ट्रॉमा) संबंधी मामलों को चिकित्सकीय रूप से प्रासंगिक प्रशिक्षण एवं सेवा-उन्मुख दृष्टिकोण के माध्यम से संबोधित किया जाता है।
अंतरविभागीय सहयोग विभाग की सेवाओं का एक महत्वपूर्ण आधार है। मेडिको-लीगल मामलों के प्रबंधन एवं दस्तावेजीकरण के लिए विभाग आपातकालीन चिकित्सा विभाग के साथ तथा फोरेंसिक नमूनों की हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच हेतु पैथोलॉजी विभाग के साथ निकटता से कार्य करता है। यह एकीकृत एवं बहु-विषयक दृष्टिकोण निदान की शुद्धता, दस्तावेजीकरण की एकरूपता तथा न्यायिक मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करता है।
चिकित्सा शिक्षा, सामुदायिक सेवा तथा अनुसंधान उत्कृष्टता के समन्वय के माध्यम से विभाग क्षेत्रीय स्तर पर मेडिको-लीगल विशेषज्ञता के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित होने का प्रयास कर रहा है, साथ ही न्याय व्यवस्था एवं जनस्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
विजन वक्तव्य
- शिक्षण, अनुसंधान एवं मेडिको-लीगल सेवाओं में संतुलित दृष्टिकोण बनाए रखते हुए फोरेंसिक मेडिसिन के क्षेत्र में उत्कृष्टता एवं नैतिकता प्राप्त करना।
- फोरेंसिक मेडिसिन एवं फोरेंसिक विज्ञान की संबद्ध शाखाओं में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित होना, जो शैक्षणिक एवं सामुदायिक दोनों आवश्यकताओं की पूर्ति कर सके।
मिशन वक्तव्य
- नैतिक रूप से सुदृढ़ और पेशेवर रूप से सक्षम चिकित्सकों का उत्पादन करना जो चिकित्सा-कानूनी जिम्मेदारियों को स्वतंत्र रूप से संभालने में सक्षम हों।
- नवाचार, अंतरविभागीय समन्वय और साक्ष्य-आधारित पद्धतियों के माध्यम से व्यापक, सटीक और समुदाय-उन्मुख चिकित्सा-कानूनी सेवाएं प्रदान करना।
संकाय
संकाय
फोरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग में समर्पित संकाय सदस्यों की एक टीम कार्यरत है, जिन्हें फोरेंसिक पैथोलॉजी, क्लिनिकल फोरेंसिक मेडिसिन, मेडिकल टॉक्सिकोलॉजी, फोरेंसिक रेडियोलॉजी, मेडिको-लीगल न्यायशास्त्र तथा फोरेंसिक मानवविज्ञान सहित विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञता प्राप्त है।
संकाय सदस्य स्नातक शिक्षण, मेडिको-लीगल प्रकरणों के प्रबंधन, शैक्षणिक मार्गदर्शन तथा अनुसंधान गतिविधियों में सक्रिय रूप से संलग्न हैं। विभाग शैक्षणिक अनुशासन, नैतिक आचरण तथा निरंतर व्यावसायिक विकास की सुदृढ़ संस्कृति को बनाए रखता है।
अन्य विभागों के साथ अंतरविभागीय समन्वय के माध्यम से विद्यार्थियों को संरचित शिक्षण अनुभव प्रदान किया जाता है, मेडिको-लीगल मामलों का प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित किया जाता है तथा फोरेंसिक हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्टिंग की सटीकता बनाए रखी जाती है।
| क्र. सं. | फोटो | नाम एवं योग्यता | पदनाम | रुचि के क्षेत्र | ई-मेल आईडी / ORCID आईडी / रिसर्चगेट |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | ![]() |
डॉ. यतीराज सिंगी एमबीबीएस, एमडी |
प्रोफेसर | क्लिनिकल फोरेंसिक मेडिसिन फोरेंसिक मानवविज्ञान चिकित्सा नैतिकता |
dr.yatiraj.fmt@aiimsbilaspur.edu.in ORCID ID: 0000-0002-0884-182X |
| 2 | ![]() |
डॉ. दिपेन दाभी | एसोसिएट प्रोफेसर | -- | dr.dipen.fmt@aiimsbilaspur.edu.in |
सेवाएं
फोरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग अस्पताल तथा आसपास के समुदाय को व्यापक मेडिको-लीगल सेवाएं प्रदान करता है। ये सेवाएं सटीकता, नैतिक आचरण तथा समयबद्ध रिपोर्टिंग की प्रतिबद्धता के साथ, नैदानिक विभागों एवं वैधानिक प्राधिकरणों के समन्वय में प्रदान की जाती हैं।
1. शवगृह सेवाएं
विभाग मानक मेडिको-लीगल प्रोटोकॉल एवं वैधानिक आवश्यकताओं के अनुरूप शवगृह सेवाओं का संचालन करता है।
- शवों का संरक्षण एवं प्रबंधन
- पहचान में सहायता
- मेडिको-लीगल मामलों हेतु सुरक्षित अभिरक्षा
- जांच एजेंसियों एवं परिजनों के साथ समन्वय
2. मेडिको-लीगल शव परीक्षण
मेडिको-लीगल पोस्टमार्टम वैज्ञानिक सटीकता एवं कानूनी अनुपालन के साथ किए जाते हैं।
- मृत्यु के कारण का निर्धारण
- चोटों का विस्तृत प्रलेखन
- आपराधिक कृत्य, विषाक्तता एवं अप्राकृतिक मृत्यु का मूल्यांकन
- विधिक रूप से मान्य पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करना
जहां लागू हो, पोस्टमार्टम निष्कर्षों का नैदानिक अभिलेखों, पुलिस जांच प्रतिवेदन एवं प्रयोगशाला जांचों के साथ समन्वय किया जाता है।
3. कम्प्यूटरीकृत पोस्टमार्टम रिपोर्टिंग
विभाग पोस्टमार्टम दस्तावेजीकरण एवं रिपोर्टिंग हेतु कम्प्यूटरीकृत प्रणालियों का उपयोग करता है, जिससे निम्नलिखित सुनिश्चित होते हैं:
- रिपोर्टों की सटीकता एवं एकरूपता
- अभिलेखों की आसान उपलब्धता
- लिपिकीय त्रुटियों में कमी
- मेडिको-लीगल दस्तावेजों का समयबद्ध प्रेषण
4. टॉक्सिकोलॉजी सहायता
विभाग निम्नलिखित संदिग्ध मामलों में विशेषज्ञ सहायता प्रदान करता है:
- विषाक्तता
- नशीले पदार्थों का दुरुपयोग
- अत्यधिक मात्रा (ओवरडोज़) से संबंधित मृत्यु
मानक टॉक्सिकोलॉजिकल दिशानिर्देशों के अनुसार नमूनों का संग्रहण, संरक्षण एवं अग्रेषण किया जाता है। प्रयोगशाला रिपोर्ट प्राप्त होने के पश्चात उनकी व्याख्या संबंधी सहायता भी प्रदान की जाती है।
5. क्लिनिकल फोरेंसिक मेडिसिन इकाई
क्लिनिकल फोरेंसिक मेडिसिन इकाई जीवित व्यक्तियों की मेडिको-लीगल जांच करती है तथा निम्नलिखित सेवाएं प्रदान करती है:
- चोटों की जांच एवं दस्तावेजीकरण
- मेडिको-लीगल प्रमाणपत्र जारी करना
- मारपीट, दुर्घटना एवं हिरासत संबंधी मामलों में विशेषज्ञ राय प्रदान करना
- आवश्यकता पड़ने पर अनुवर्ती मेडिको-लीगल मूल्यांकन
6. यौन उत्पीड़न एवं बाल शोषण जांच
विभाग निम्नलिखित मामलों में मेडिको-लीगल परीक्षण एवं दस्तावेजीकरण प्रदान करता है:
- यौन उत्पीड़न की वयस्क पीड़िताएं/पीड़ित
- पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) के अंतर्गत आने वाले बच्चे
ये सेवाएं संवेदनशीलता, गोपनीयता एवं कानूनी अनुपालन के साथ, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग, बाल रोग विभाग तथा संबंधित प्राधिकरणों के समन्वय में प्रदान की जाती हैं।
7. आयु निर्धारण सेवाएं
मेडिको-लीगल आयु निर्धारण निम्नलिखित उद्देश्यों हेतु किया जाता है:
- आपराधिक मामले
- दीवानी विवाद
- किशोर न्याय संबंधी मामले
- खेल प्राधिकरण
- सरकारी विभाग
स्वीकृत मेडिको-लीगल प्रोटोकॉल के अनुसार मानक नैदानिक, रेडियोलॉजिकल एवं दस्तावेजी विधियों का उपयोग किया जाता है।
8. अस्पताल विभागों हेतु मेडिको-लीगल परामर्श
विभाग एम्स बिलासपुर के विभिन्न नैदानिक विभागों को विशेषज्ञ मेडिको-लीगल मार्गदर्शन प्रदान करता है, जिनमें शामिल हैं:
- आपातकालीन चिकित्सा
- शल्य चिकित्सा
- अस्थि रोग विभाग
- प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग
- बाल रोग विभाग
- मनोचिकित्सा विभाग
दस्तावेजीकरण, प्रमाणन, मेडिको-लीगल राय तथा न्यायालय संबंधी प्रश्नों के लिए सहायता प्रदान की जाती है।
9. प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण
विभाग नियमित रूप से निम्नलिखित के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है:
- हिमाचल प्रदेश के चिकित्सा अधिकारी
- शवगृह कर्मचारी एवं फोरेंसिक सहयोगी कर्मचारी
- इंटर्न एवं स्नातकोत्तर प्रशिक्षु (जहां लागू हो)
प्रशिक्षण में निम्नलिखित विषयों पर व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया जाता है:
- शव परीक्षण तकनीकें
- चोटों की व्याख्या
- दस्तावेजीकरण मानक
- न्यायालयीन प्रक्रियाएं
- नैतिक एवं कानूनी उत्तरदायित्व
आंकड़े
फोरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग आपातकालीन विभाग एवं शवगृह के माध्यम से संचालित मेडिको-लीगल कार्यभार का विस्तृत सांख्यिकीय अभिलेख रखता है। सेवा भार का आकलन करने, देखभाल प्रणालियों में सुधार लाने तथा शैक्षणिक एवं अनुसंधान गतिविधियों को समर्थन प्रदान करने हेतु इन आंकड़ों का व्यवस्थित संकलन एवं समय-समय पर विश्लेषण किया जाता है।
पारदर्शी रिपोर्टिंग, प्रशासनिक योजना निर्माण तथा शैक्षणिक अभिलेखीकरण को सुगम बनाने के लिए आंकड़ों को मासिक प्रारूप में प्रस्तुत किया जाता है।
1. आपातकालीन विभाग में मेडिको-लीगल मामले
इस अनुभाग में आपातकालीन विभाग में विभाग द्वारा परीक्षण एवं प्रलेखित सभी मेडिको-लीगल मामलों का विवरण दर्ज किया जाता है, जिनमें शामिल हैं:
- सड़क यातायात दुर्घटनाएं
- मारपीट के मामले
- यौन अपराध
- विषाक्तता एवं नशे की स्थिति
- जलने एवं विद्युताघात के मामले
- हिरासत संबंधी मामले
- अन्य सभी विधिक रूप से रिपोर्ट किए जाने योग्य चिकित्सीय स्थितियां
मासवार वितरण (आपातकालीन मामले)
| वर्ष | जनवरी | फरवरी | मार्च | अप्रैल | मई | जून | जुलाई | अगस्त | सितंबर | अक्टूबर | नवंबर | दिसंबर |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 2022 | -- | -- | -- | -- | -- | -- | -- | -- | 07 | 38 | 59 | 82 |
| 2023 | 101 | 110 | 132 | 110 | 114 | 138 | 161 | 187 | 207 | 188 | 165 | 168 |
| 2024 | 168 | 164 | 162 | 110 | 114 | 138 | 161 | 187 | 214 | 226 | 224 | 250 |
| 2025 | 269 | 274 | 294 |
2. मेडिको-लीगल शव परीक्षण
इस अनुभाग में शव परीक्षण से संबंधित कार्यभार का विवरण प्रस्तुत किया गया है, जिसमें शामिल हैं:
- अप्राकृतिक मृत्यु
- संदिग्ध मृत्यु
- हिरासत में हुई मृत्यु
- विषाक्तता / ओवरडोज़
- जलने एवं आघात से संबंधित मृत्यु
- अज्ञात शवों की जांच
मासवार वितरण (शव परीक्षण)
| वर्ष | जनवरी | फरवरी | मार्च | अप्रैल | मई | जून | जुलाई | अगस्त | सितंबर | अक्टूबर | नवंबर | दिसंबर |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 2024 | -- | -- | -- | 06 | 11 | 08 | 22 | 20 | 15 | 13 | 16 | 16 |
| 2025 | 16 | 18 | 14 |
पाठ्यक्रम और अल्पकालिक प्रशिक्षण
शैक्षणिक कार्यक्रम
| पाठ्यक्रम का नाम | पाठ्यक्रम | अवधि | वर्तमान प्रवेश क्षमता | उद्देश्य / संक्षिप्त विवरण |
|---|---|---|---|---|
| एमबीबीएस | संस्थागत पाठ्यक्रम | 5½ वर्ष | 100 प्रति वर्ष |
|
| एमडी (फोरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी) | संस्थागत पाठ्यक्रम | 3 वर्ष | 02 प्रति वर्ष |
|
| फोरेंसिक हिस्टोपैथोलॉजी में फेलोशिप | संस्थागत पाठ्यक्रम | 1 वर्ष | 01 प्रति वर्ष |
|
अल्पकालिक प्रशिक्षण कार्यक्रम
विभाग निम्नलिखित के लिए संरचित अल्पकालिक प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित करता है:
- हिमाचल प्रदेश के चिकित्सा अधिकारी
- इंटर्न एवं रेजिडेंट चिकित्सक
- शवगृह तकनीशियन एवं सहयोगी कर्मचारी
- कानून प्रवर्तन अधिकारी (जहां लागू हो)
प्रशिक्षण के प्रमुख क्षेत्र:
- शव परीक्षण तकनीकें
- चोटों के पैटर्न की पहचान
- मृत्यु के कारण का विश्लेषण
- दस्तावेजीकरण एवं कानूनी अनुपालन
- साक्ष्य श्रृंखला (Chain of Custody) एवं नमूना प्रबंधन
- न्यायालयीन प्रक्रियाएं एवं विशेषज्ञ गवाही
कार्यशालाएं एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र संस्थागत कार्यक्रमों एवं संचालनात्मक आवश्यकताओं के अनुसार समय-समय पर आयोजित किए जाते हैं।
अनुसंधान
फोरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग फोरेंसिक पैथोलॉजी, टॉक्सिकोलॉजी, क्लिनिकल फोरेंसिक मेडिसिन तथा संबंधित विषयों में सक्रिय रूप से अनुसंधान कार्यों में संलग्न है। विभाग के संकाय सदस्य मेडिको-लीगल प्रथाओं में सुधार लाने, शैक्षणिक उन्नति को बढ़ावा देने तथा साक्ष्य-आधारित फोरेंसिक विज्ञान को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से विभिन्न शोध परियोजनाओं का संचालन करते हैं।
अनुसंधान गतिविधियों में वित्तपोषित परियोजनाएं, स्नातकोत्तर शोध प्रबंध कार्य तथा समीक्षित (Peer-reviewed) वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित शोध शामिल हैं।
1. अनुसंधान परियोजनाएं
| परियोजना का शीर्षक | अन्वेषक | सहयोग | वित्तपोषण एजेंसी | परियोजना की स्थिति |
|---|---|---|---|---|
| हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिलों की स्वदेशी आबादी में हाथ एवं पैरों के आयामों का कद के साथ सहसंबंध | PI: डॉ. यतीराज सिंगी Co-I: डॉ. दिपेन दाभी |
-- | ICMR (₹5,45,000) | पूर्ण (2024) |
| हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिलों की स्वदेशी आबादी में कपाल-मुखीय मापों का कद के साथ सहसंबंध | PI: डॉ. दिपेन दाभी Co-I: डॉ. यतीराज सिंगी |
-- | स्व-वित्तपोषित | पूर्ण (2024) |
| उत्तर भारतीय जनसंख्या में 9वीं एवं 10वीं वक्षीय कशेरुकाओं के मापीय विश्लेषण द्वारा क्लिनिकल छाती एक्स-रे के माध्यम से लिंग निर्धारण | PI: डॉ. दिपेन दाभी Co-I: डॉ. यतीराज सिंगी, डॉ. लोकेश राणा |
रेडियोलॉजी विभाग | स्व-वित्तपोषित | प्रगति पर |
2. शोध प्रबंध / थीसिस मार्गदर्शन
इस अनुभाग में विभाग के संकाय सदस्यों द्वारा मार्गदर्शित स्नातकोत्तर शोध कार्यों का विवरण प्रस्तुत किया गया है।
| वर्ष | विद्यार्थी का नाम | डिग्री | शोध प्रबंध का शीर्षक | मार्गदर्शक / सह-मार्गदर्शक |
|---|---|---|---|---|
| 2025 | डॉ. जैस्मिन जैन | MD | घातक ट्रॉमेटिक ब्रेन इंजरी के मामलों में रक्त एवं CSF में S-100B बायोमार्कर स्तर तथा मस्तिष्क ऊतक के हिस्टोपैथोलॉजिकल एवं इम्यूनोहिस्टोकेमिकल निष्कर्षों के मध्य सहसंबंध – शव परीक्षण आधारित अध्ययन | मार्गदर्शक: डॉ. यतीराज सिंगी सह-मार्गदर्शक: डॉ. दिपेन दाभी, डॉ. गुरविंदर कौर, डॉ. अनुराग सांख्यान |
3. संकाय सदस्यों के शोध प्रकाशन
2025
- ताजे पानी में डूबने से हुई मृत्यु की पहचान में Pleural Effusion Ratio तथा Drowning Index की नैदानिक उपयोगिता की तुलना।
- संशोधित हंसिया से उत्पन्न पैटर्नयुक्त चोटें: फोरेंसिक अवलोकन एवं अंतर्दृष्टि — केस रिपोर्ट।
- अचानक मृत्यु को अधिसूचित श्रेणी में शामिल करने की कर्नाटक की पहल: राष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण आवश्यकता।
- ताजे पानी में डूबने की पहचान हेतु Drowning Index का मूल्यांकन: एक तुलनात्मक अध्ययन।
- दुर्लभ एनेस्थेटिक दवा से हुई मृत्यु में चींटियों की गतिविधि के पैटर्न का विश्लेषण: केस रिपोर्ट।
- उच्च हिमालयी जनजातीय आबादी में जातीय वंशावली के संकेतक के रूप में Facial Index का अध्ययन।
2024
- उच्च हिमालयी जनजातीय आबादी में Facial Index एवं जातीय वंशावली का अध्ययन।
- हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिलों की स्वदेशी आबादी में Cephalic Index का परिवर्तन।
- टेलीमेडिसिन दिशानिर्देशों की अस्पष्टताओं के कारण अप्रमाणित चिकित्सा प्रमाणपत्रों में वृद्धि।
- सूर्यास्त के बाद पोस्टमार्टम (रात्रिकालीन शव परीक्षण): एक समीक्षात्मक अध्ययन।
- न्यूरोसर्जरी के बाद मैनिटोल प्रशासन के पश्चात हेमोडायनामिक एवं सेरेब्रोवैस्कुलर परिवर्तनों का क्रमिक मूल्यांकन।
- मूलभूत ट्रान्सथोरेसिक इकोकार्डियोग्राफी शिक्षण में सिमुलेशन आधारित एवं पॉइंट-ऑफ-केयर शिक्षण की तुलना।
2023
- कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान ग्रामीण हरियाणा में आत्महत्या, हत्या एवं सड़क दुर्घटना से हुई मौतों की जनसांख्यिकीय प्रोफ़ाइल।
- शिक्षण संस्थान में प्रस्तुत सर्पदंश रोगियों की नैदानिक एवं महामारी विज्ञान संबंधी प्रोफ़ाइल तथा परिणाम।
2022
- कोविड-19 रोगियों में मृत्यु दर के साथ रक्त एवं जैव-रासायनिक मापदंडों का संबंध।
- चित्रदुर्ग क्षेत्र के एक तृतीयक चिकित्सा शिक्षण संस्थान में बाल्यावस्था विषाक्तता मामलों की प्रोफ़ाइल का अध्ययन।
- इन्फ्राअम्बिलिकल शल्यक्रियाओं में इंट्राथीकल लेवोबुपिवाकेन एवं बुपिवाकेन की गुणवत्ता एवं सुरक्षा की तुलना।
2021
- कोविड-19 के दौरान दाह संस्कार / दफन संबंधी दिशानिर्देशों की आवश्यकता।
- पटेला के ऑस्टियोमेट्रिक विश्लेषण द्वारा लैंगिक भिन्नता का आकलन।
- हरियाणा की स्थानीय आबादी में उंगली की लंबाई एवं कद के मध्य सहसंबंध।
4. अनुसंधान के प्रमुख क्षेत्र
- फोरेंसिक पैथोलॉजी एवं हिस्टोपैथोलॉजी
- चोटों के पैटर्न का विश्लेषण
- फोरेंसिक टॉक्सिकोलॉजी एवं विषाक्तता के रुझान
- क्लिनिकल फोरेंसिक विषय
- न्यायशास्त्र एवं मेडिको-लीगल नैतिकता
- फोरेंसिक रेडियोलॉजी एवं इमेजिंग
- फोरेंसिक मानवविज्ञान
- बाल शोषण एवं यौन उत्पीड़न का दस्तावेजीकरण
- जनस्वास्थ्य एवं फोरेंसिक विज्ञान का अंतर्संबंध
सहयोग
फोरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग अनुसंधान, नैदानिक सेवाओं तथा शैक्षणिक आदान-प्रदान को सुदृढ़ बनाने के लिए अंतर्विषयी एवं अंतर-संस्थागत सहयोगों में सक्रिय रूप से संलग्न है। सहयोगात्मक गतिविधियाँ उन्नत फोरेंसिक जांच, संकाय अनुसंधान, प्रयोगशाला सहयोग तथा तकनीकी प्रशिक्षण पर केंद्रित हैं।
ये सहयोग साझा विशेषज्ञता, अवसंरचना एवं अंतरविभागीय समन्वय के माध्यम से अनुप्रयुक्त (Translational) अनुसंधान को बढ़ावा देते हैं तथा मेडिको-लीगल सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करते हैं।
वर्तमान / प्रस्तावित सहयोग
| सहयोग का उद्देश्य | सहयोगी विभाग / संस्थान | प्रदान की जाने वाली सेवाएं / किए जा रहे कार्य |
|---|---|---|
| विवरण शीघ्र अद्यतन किया जाएगा। | ||
संस्थान के भीतर सहयोग
- आपातकालीन चिकित्सा विभाग – मेडिको-लीगल मामलों का प्रबंधन
- पैथोलॉजी विभाग – फोरेंसिक हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्टिंग
- रेडियोलॉजी विभाग – फोरेंसिक इमेजिंग सहायता
- बाल रोग विभाग – बाल शोषण एवं POCSO अधिनियम से संबंधित मामलों का प्रबंधन
- प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग – यौन उत्पीड़न मामलों की चिकित्सीय जांच
- मनोचिकित्सा विभाग – मेडिको-लीगल मामलों में मानसिक स्वास्थ्य मूल्यांकन
विभाग फोरेंसिक विज्ञान तथा मेडिको-लीगल सेवाओं के उन्नयन के अपने उद्देश्य के अनुरूप शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोगों का स्वागत करता है।
विस्तार योजना
फोरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग फोरेंसिक विज्ञान, चिकित्सा शिक्षा तथा आपदा प्रबंधन की उभरती आवश्यकताओं के अनुरूप अवसंरचना एवं सेवाओं के क्रमिक विकास की परिकल्पना करता है। विभाग की विस्तार योजना का उद्देश्य नैदानिक क्षमता, शैक्षणिक उत्कृष्टता तथा सामुदायिक सहभागिता को सुदृढ़ बनाना है। :contentReference[oaicite:0]{index=0}
प्रस्तावित अवसंरचना एवं क्षमता निर्माण
1. उन्नत शव परीक्षण परिसर
निम्नलिखित सुविधाओं से युक्त अत्याधुनिक शव परीक्षण परिसर स्थापित करने की योजना है:
- रात्रिकालीन शव परीक्षण की सुविधा
- अधिक संख्या में मामलों के प्रबंधन की क्षमता
- जैव-सुरक्षा मानकों का पालन
- मेडिको-लीगल एवं फोरेंसिक अनुसंधान गतिविधियों को समर्थन
2. सामूहिक आपदा प्रबंधन सुविधा
विभाग निम्नलिखित के लिए एक समर्पित प्रणाली स्थापित करने की योजना बना रहा है:
- सामूहिक हताहत एवं आपदा स्थितियों का प्रबंधन
- आपदाओं के दौरान पीड़ितों की पहचान
- शव टैगिंग, दस्तावेजीकरण एवं संरक्षण प्रोटोकॉल
- संबंधित एजेंसियों के सहयोग से आपदा तैयारी प्रशिक्षण एवं मॉक ड्रिल
3. वर्चुअल शव परीक्षण सुविधा
विभाग निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए डिजिटल तकनीकों को एकीकृत करने का लक्ष्य रखता है:
- सीटी-आधारित शव परीक्षण (वर्टॉप्सी)
- गैर-आक्रामक आंतरिक परीक्षण
- रेडियोलॉजिकल शरीर रचना एवं ट्रॉमा पैटर्न का शिक्षण
- मेडिको-लीगल मामलों का अभिलेखीकरण एवं पुनरीक्षण
प्रयोगशाला विकास
4. विश्लेषणात्मक विषविज्ञान प्रयोगशाला
प्रस्तावित प्रयोगशाला निम्नलिखित कार्यों में सहयोग प्रदान करेगी:
- विषैले पदार्थों का रासायनिक विश्लेषण
- विषाक्तता मामलों की व्याख्या
- विषविज्ञान में शैक्षणिक अनुसंधान
- स्नातकोत्तर विद्यार्थियों का प्रशिक्षण
- मेडिको-लीगल जांचों में गुणवत्ता आश्वासन
5. फोरेंसिक जेनेटिक्स प्रयोगशाला
निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए आनुवंशिक प्रयोगशाला स्थापित करने की योजना है:
- मेडिको-लीगल मामलों में डीएनए विश्लेषण
- अज्ञात अथवा विघटित शवों की पहचान
- जैविक संबंध (Kinship) विश्लेषण
- फोरेंसिक जीवविज्ञान में अनुसंधान
6. फोरेंसिक हिस्टोपैथोलॉजी प्रयोगशाला
स्वतंत्र फोरेंसिक हिस्टोपैथोलॉजी प्रयोगशाला विकसित करने का प्रस्ताव है, जिससे निम्नलिखित कार्य संभव होंगे:
- मेडिको-लीगल मामलों में ऊतकों का सूक्ष्मदर्शीय परीक्षण
- क्लिनिको-पैथोलॉजिकल सहसंबंध
- फोरेंसिक हिस्टोपैथोलॉजी में शिक्षण एवं फेलोशिप प्रशिक्षण
7. फोरेंसिक मानवविज्ञान प्रयोगशाला
फोरेंसिक मानवविज्ञान इकाई की स्थापना से निम्नलिखित कार्यों में सहायता मिलेगी:
- कंकाल अवशेषों की पहचान
- आयु एवं लिंग निर्धारण
- सामूहिक आपदाओं में प्राप्त अवशेषों का विश्लेषण
- अनुसंधान एवं शैक्षणिक प्रशिक्षण
शैक्षणिक एवं जन-जागरूकता सुविधाएं
8. फोरेंसिक मेडिसिन संग्रहालय
निम्नलिखित उद्देश्यों हेतु एक समर्पित संग्रहालय स्थापित करने का प्रस्ताव है:
- चिकित्सा विद्यार्थियों का शिक्षण
- जन-जागरूकता एवं सार्वजनिक शिक्षा
- शारीरिक एवं फोरेंसिक मॉडलों का प्रदर्शन
- प्रशिक्षुओं एवं आगंतुकों को मेडिको-लीगल अवधारणाओं का प्रदर्शन
9. विषविज्ञान उद्यान
निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए एक समर्पित विषविज्ञान उद्यान स्थापित करने का प्रस्ताव है:
- औषधीय एवं विषैले पौधों का संवर्धन
- विद्यार्थियों को व्यावहारिक शिक्षण उपलब्ध कराना
- पादप-आधारित विषविज्ञान अनुसंधान को समर्थन देना
- प्रशिक्षुओं एवं स्वास्थ्यकर्मियों में विषैले पौधों के प्रति जागरूकता बढ़ाना
डिजिटल नवाचार
फोरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग दक्षता, सटीकता, जवाबदेही एवं पारदर्शिता बढ़ाने के लिए मेडिको-लीगल सेवाओं के डिजिटल रूपांतरण हेतु प्रतिबद्ध है। जांच एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय सुनिश्चित करते हुए मेडिको-लीगल आंकड़ों के सुरक्षित प्रबंधन के लिए नवीन इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियां विकसित की जा रही हैं।
1. इलेक्ट्रॉनिक पुलिस सूचना प्रणाली
निम्नलिखित उद्देश्यों हेतु एक संरचित इलेक्ट्रॉनिक सूचना प्रणाली लागू की गई है:
- पुलिस प्राधिकरणों को वास्तविक समय में सूचना उपलब्ध कराना
- सूचना हस्तांतरण में होने वाली देरी को कम करना
- मेडिको-लीगल मामलों के पंजीकरण में कानूनी अनुपालन को सुदृढ़ करना
- अनुरेखण योग्य इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख बनाए रखना
2. स्वचालित पोस्टमार्टम रिपोर्ट सूचना प्रणाली
निम्नलिखित उद्देश्यों हेतु एक डिजिटल संचार प्रणाली लागू की गई है:
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट पूर्ण होने पर इलेक्ट्रॉनिक सूचना उत्पन्न करना
- मैनुअल निर्भरता को कम करना
- कार्य निष्पादन समय में सुधार करना
3. डिजिटल पोस्टमार्टम रिकॉर्ड डेटाबेस
निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए एक केंद्रीकृत डिजिटल डेटाबेस प्रस्तावित है:
- पोस्टमार्टम अभिलेखों का व्यवस्थित भंडारण
- दीर्घकालिक अभिलेखीकरण
- लेखा-परीक्षण एवं अनुसंधान हेतु मामलों की पुनर्प्राप्ति
- डेटा-आधारित विश्लेषण को प्रोत्साहन
इस डेटाबेस में निम्नलिखित शामिल होंगे:
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट
- जियोटैग की गई तस्वीरें
- केस पहचान संख्या
- नमूना विवरण
- जांच एजेंसी की जानकारी
- एफएसएल रिपोर्ट
- हिस्टोपैथोलॉजी निष्कर्ष
- विषविज्ञान परिणाम
- इमेजिंग डेटा
इस एकीकृत प्रणाली से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होंगे:
- संपूर्ण केस रिकॉर्ड तक एकल मंच से पहुंच
- त्वरित मेडिको-लीगल राय तैयार करना
- कागजी कार्यवाही में कमी
- कानूनी मजबूती एवं विश्वसनीयता
विभाग का लक्ष्य एक पूर्णतः पेपरलेस फोरेंसिक प्रणाली विकसित करना है, जिसमें पुलिस, पैथोलॉजी, विषविज्ञान, रेडियोलॉजी एवं फोरेंसिक विज्ञान सेवाओं के बीच डिजिटल समन्वय सुनिश्चित हो।
भविष्य की दिशा
चरणबद्ध विकास के माध्यम से विभाग फोरेंसिक मेडिसिन के क्षेत्र में एक क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित होने का प्रयास कर रहा है, जो नियमित मेडिको-लीगल कार्य, जटिल फोरेंसिक जांचों तथा बड़े पैमाने की आपदा प्रतिक्रिया को प्रभावी ढंग से संभालने में सक्षम हो।
01/06/2026 11:58:05

