कीटाणु-विज्ञान

विजन वक्तव्य

सूक्ष्मजीवविज्ञान विभाग नैदानिक ​​सूक्ष्मजीवविज्ञान में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में स्थापित होने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें गुणवत्ता आश्वासन और मानकीकरण पर विशेष बल दिया जाता है। यह प्रशिक्षण और अनुसंधान के माध्यम से अकादमिक विकास को बढ़ावा देते हुए सटीक, समयबद्ध और विश्वसनीय नैदानिक ​​सेवाएं प्रदान करने का प्रयास करता है।

मिशन वक्तव्य

  • मजबूत गुणवत्ता आश्वासन प्रणालियों के माध्यम से विश्वसनीय, सटीक और मानकीकृत नैदानिक ​​सूक्ष्मजीवविज्ञान सेवाएं प्रदान करना, जिसमें बाह्य गुणवत्ता आश्वासन सेवाओं (ईक्यूएएस) का कार्यान्वयन शामिल है।
  • एनएबीएल प्रत्यायन की दिशा में प्रगति, राष्ट्रीय मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करना और निरंतर गुणवत्ता सुधार।
  • आणविक निदान, जीवाणु विज्ञान, विषाणु विज्ञान, सीरोलॉजी, कवक विज्ञान, परजीवी विज्ञान और संबंधित विषयों जैसे उन्नत नैदानिक ​​अनुभागों के विकास के साथ प्रयोगशाला क्षमताओं का विस्तार और सुदृढ़ीकरण करें।
  • बीएससी, पीएचडी और पीडीसीसी कार्यक्रमों की शुरुआत और सुदृढ़ीकरण के माध्यम से अकादमिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देना, कुशल प्रशिक्षण और विशेषज्ञता को प्रोत्साहित करना।
  • रोगी देखभाल और सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों में सुधार के लिए नवाचार, अंतःविषय सहयोग और साक्ष्य-आधारित प्रथाओं को प्रोत्साहित करके सूक्ष्मजीव विज्ञान में अनुसंधान को आगे बढ़ाएं।

संकाय

क्र. सं. फोटो नाम एवं योग्यता पदनाम रुचि के क्षेत्र ई-मेल आईडी / रिसर्चगेट / ORCID आईडी
1 डॉ. प्रीति अग्रवाल डॉ. प्रीति अग्रवाल प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष
  • जीवाणुविज्ञान – श्वसन रोगजनक एवं रिकेट्सियल संक्रमण
  • एएमआर (AMR) जीनों की पहचान
  • माइकोबैक्टीरियोलॉजी (टीबी)
  • अस्पताल संक्रमण नियंत्रण
  • विषाणुविज्ञान (Virology)
dr.priti.micro@aiimsbilaspur.edu.in
drpritiagarwal2@gmail.com
ORCID ID: 0000-0002-5774-6837
2 डॉ. पुनीत कुमार गुप्ता डॉ. पुनीत कुमार गुप्ता अतिरिक्त प्रोफेसर
  • जीवाणुविज्ञान (विशेषकर रक्त एवं शरीर द्रव तथा आंत्र प्रयोगशाला)
  • प्रतिरक्षाविज्ञान सहित सीरोलॉजी
  • यौन संचारित रोग (STD)
  • उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग
  • अस्पताल संक्रमण रोकथाम एवं नियंत्रण
  • विषाणुविज्ञान (Virology)
dr.puneet.micro@aiimsbilaspur.edu.in
drpuneetkumargupta@gmail.com
ORCID ID: 0000-0003-4336-7737
3 डॉ. नेहा गौतम डॉ. नेहा गौतम अतिरिक्त प्रोफेसर
  • जीवाणुविज्ञान – मवाद एवं शरीर द्रव
  • फंगल रोगजनक
  • अस्पताल संक्रमण
dr.neha.micro@aiimsbilaspur.edu.in
ORCID ID: 0000-0001-4336-7737
4 डॉ. मेघा शर्मा डॉ. मेघा शर्मा एसोसिएट प्रोफेसर
  • जीवाणुविज्ञान (विशेषकर श्वसन एवं मूत्रजनित रोगजनक)
  • एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध
  • आणविक सूक्ष्मजैविकी
  • माइकोबैक्टीरियोलॉजी
  • एंटीमाइक्रोबियल स्टूअर्डशिप एवं अस्पताल संक्रमण नियंत्रण (HIC)
  • उभरते हुए रोगजनक
  • विषाणुविज्ञान (Virology)
dr.megha.micro@aiimsbilaspur.edu.in
ORCID ID: 0000-0002-6740-0493
5 डॉ. विभा मेहता डॉ. विभा मेहता सहायक प्रोफेसर
  • सीरोलॉजी
  • परजीवी विज्ञान
  • आंत्रीय जीवाणु
dr.vibha.micro@aiimsbilaspur.edu.in

सेवाएं

नैदानिक सूक्ष्मजैविकी सेवाएँ

  • जीवाणुविज्ञान (Bacteriology) सेवाएँ
    • ग्राम स्टेनिंग एवं सूक्ष्मदर्शी परीक्षण
    • एरोबिक कल्चर एवं संवेदनशीलता परीक्षण
    • जीवाणु रोगजनकों की पहचान
    • एंटीमाइक्रोबियल संवेदनशीलता परीक्षण (AST)
    • रक्त एवं शरीर के निष्क्रम (स्टेराइल) द्रवों की जीवाणु कल्चर जाँच हेतु अवकाश दिवस सेवाएँ
  • फंगल संक्रमणों के लिए माइकोलॉजी सेवाएँ।
  • पीसीआर (PCR) आधारित परीक्षणों सहित आणविक नैदानिक सेवाएँ।
  • ऊतक नमूनों से आणविक निदान सहित माइकोबैक्टीरियोलॉजी सेवाएँ।
  • परजीवी विज्ञान हेतु मल परीक्षण।
  • संक्रामक रोगों के लिए त्वरित नैदानिक परीक्षण।

क्षेत्रीय वीआरडीएल (Regional VRDL) सेवाएँ

  • नैदानिक विषाणुविज्ञान एवं 24×7 सीरोलॉजिकल परीक्षण सेवाएँ।
  • संक्रामक रोगों के लिए उन्नत आणविक परीक्षण।
  • नैदानिक सूक्ष्मजैविकी तकनीकों एवं जैव-सुरक्षा प्रोटोकॉल का प्रशिक्षण।

अस्पताल संक्रमण नियंत्रण एवं एंटीमाइक्रोबियल स्टूअर्डशिप

  • अस्पताल संक्रमण रोकथाम एवं नियंत्रण (HIC) गतिविधियाँ।
  • स्वास्थ्य सेवा-संबंधित संक्रमणों (HAIs) की निगरानी।
  • एंटीबायोग्राम तैयार करना एवं एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध की निगरानी।
  • एंटीबायोटिक दवाओं के तर्कसंगत उपयोग हेतु मार्गदर्शन।
  • एंटीमाइक्रोबियल स्टूअर्डशिप प्रोग्राम (AMSP)।
  • प्रकोप (Outbreak) की जाँच एवं संक्रमण निगरानी गतिविधियाँ।

गुणवत्ता आश्वासन गतिविधियाँ

  • आंतरिक गुणवत्ता नियंत्रण (IQC) एवं बाह्य गुणवत्ता आश्वासन (EQA)।
  • प्रयोगशाला मानकीकरण एवं प्रत्यायन (Accreditation) संबंधी गतिविधियाँ।
  • जैव-सुरक्षा एवं गुणवत्तापूर्ण प्रयोगशाला पद्धतियों का रखरखाव।

विभाग द्वारा प्रदान की जाने वाली नैदानिक सेवाएँ

जीवाणुविज्ञान (Bacteriology)
निम्नलिखित नमूनों के लिए स्टेनिंग, कल्चर एवं स्वचालित एंटीमाइक्रोबियल संवेदनशीलता परीक्षण:

  • रक्त एवं शरीर के द्रव
  • मूत्र मार्ग के नमूने
  • मवाद एवं ऊतक नमूने
  • श्वसन तंत्र के नमूने

माइकोलॉजी (Mycology)
फंगल रोगजनकों के लिए स्मीयर एवं कल्चर परीक्षण।

परजीवी विज्ञान (Parasitology)
अंडों एवं सिस्ट की पहचान हेतु मल का सूक्ष्मदर्शीय परीक्षण।

माइकोबैक्टीरियोलॉजी (Mycobacteriology)
ऊतक नमूनों सहित क्षय रोग (Tuberculosis) के लिए कार्ट्रिज-आधारित न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्ट (CBNAAT) तथा ज़ीहल-नीलसन (ZN) स्मीयर परीक्षण।

बायोमार्कर (Biomarkers)
प्रोकेल्सीटोनिन परीक्षण।

विभाग विभिन्न प्रकार की प्रयोगशाला जाँचों को सम्मिलित करते हुए व्यापक नैदानिक सूक्ष्मजैविकी सेवाएँ प्रदान करता है।

आणविक सूक्ष्मजैविकी (Molecular Microbiology)
संक्रामक रोगों के निदान हेतु उन्नत पीसीआर-आधारित एवं अन्य आणविक परीक्षण प्लेटफॉर्म के माध्यम से आणविक जाँच सेवाएँ प्रदान की जाती हैं।

सीरोलॉजी (Serology)

एंटी हेपेटाइटिस-बी कोर एंटीबॉडी IgM डेंगू नॉन-स्ट्रक्चरल प्रोटीन-1 (NS1) हेपेटाइटिस-बी सतही प्रतिजन (HBsAg) हेपेटाइटिस-बी कोर एंटीबॉडी (कुल) लेप्टोस्पाइरा ELISA
डेंगू इम्युनोग्लोबुलिन G (IgG) हेपेटाइटिस-ए वायरस इम्युनोग्लोबुलिन M (IgM) हेपेटाइटिस-सी एंटीबॉडी हेपेटाइटिस-ई वायरस इम्युनोग्लोबुलिन M (IgM) स्क्रब टाइफस ELISA
डेंगू इम्युनोग्लोबुलिन M (IgM) हेपेटाइटिस-बी ई प्रतिजन एवं एंटी हेपेटाइटिस-बी ई एंटीबॉडी हेपेटाइटिस-ई वायरस इम्युनोग्लोबुलिन G (IgG) मानव प्रतिरक्षा अपूर्णता विषाणु (HIV) सीरोलॉजी सिफिलिस एंटीबॉडी

सांख्यिकी पाठ्यक्रम और अल्पकालिक प्रशिक्षण

क्र. सं. पाठ्यक्रम का नाम पाठ्यक्रम पाठ्यक्रम की अवधि वर्तमान विद्यार्थियों की संख्या उद्देश्य / पाठ्यक्रम का संक्षिप्त विवरण
1 एम.डी. माइक्रोबायोलॉजी माइक्रोबायोलॉजी 03 वर्ष 2

स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को निम्नलिखित क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया जाता है:

  • संक्रामक रोगों के निदान एवं प्रबंधन में विशेषज्ञता विकसित करना।
  • रोगी देखभाल हेतु माइक्रोबायोलॉजी के नैदानिक अनुप्रयोगों में कौशल विकसित करना।
  • संक्रमण नियंत्रण एवं एंटीमाइक्रोबियल स्टूअर्डशिप में दक्षता विकसित करना।
  • अनुसंधान, शिक्षण एवं संचार कौशल को बढ़ावा देना।

प्रशिक्षण में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • नियमित सेमिनार एवं जर्नल क्लब।
  • सम्मेलनों एवं कार्यशालाओं में सहभागिता।
  • नियमित मूल्यांकन एवं प्रतिपुष्टि (फीडबैक)।
  • माइक्रोबायोलॉजी में संरचित शोध-प्रबंध (थीसिस) कार्य के माध्यम से अनुसंधान प्रशिक्षण, जिससे अध्ययन रूपरेखा, डेटा विश्लेषण एवं वैज्ञानिक लेखन कौशल विकसित होते हैं।
2 एमबीबीएस स्नातक चिकित्सा शिक्षा माइक्रोबायोलॉजी में 1 वर्ष 100
  • एमबीबीएस विद्यार्थियों को सूक्ष्मजीवों, संक्रामक रोगों एवं मेजबान-रोगजनक (Host–Pathogen) अंतःक्रियाओं की मूलभूत समझ प्रदान करना।
  • नैदानिक अभ्यास से संबंधित प्रयोगशाला निदान एवं परिणामों की व्याख्या करने के कौशल विकसित करना।
  • संक्रमण की रोकथाम, नियंत्रण एवं एंटीमाइक्रोबियल दवाओं के विवेकपूर्ण उपयोग पर बल देना।
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य, महामारी विज्ञान तथा संक्रामक रोगों से संबंधित राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रति जागरूकता विकसित करना।
3 पैरामेडिकल साइंसेज़ (बी.एससी. एमएलटी) बी.एससी. मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी माइक्रोबायोलॉजी में 03 वर्ष 23
  • नमूना प्रसंस्करण, परीक्षण एवं रिपोर्टिंग हेतु दक्ष प्रयोगशाला पेशेवरों को प्रशिक्षित करना।
  • पारंपरिक एवं उन्नत नैदानिक तकनीकों का ज्ञान प्रदान करना।
  • उपकरणों के संचालन में शुद्धता एवं गुणवत्ता आश्वासन संबंधी कौशल विकसित करना।
  • समस्या-समाधान, परिणामों की व्याख्या तथा प्रयोगशाला सुरक्षा के लिए क्षमता विकसित करना।

अनुसंधान

क्र. सं. शीर्षक प्रधान अन्वेषक सह-अन्वेषक सहयोग वित्तपोषण एजेंसी परियोजना की स्थिति
1 क्षेत्रीय वीआरडीएल (Regional VRDL) डॉ. प्रीति अग्रवाल डॉ. पुनीत कुमार गुप्ता
डॉ. मेघा शर्मा
आवश्यकता अनुसार संस्थान के विभिन्न विभागों तथा क्षेत्र के अन्य संस्थानों के साथ सहयोग। आईसीएमआर-डीएचआर प्रगति पर
2 उत्तर-पश्चिम भारत में तीव्र ज्वरजनित रोग (AFI) की बहु-केंद्रीय सिंड्रोमिक निगरानी डॉ. पुनीत कुमार गुप्ता डॉ. अजय जरयाल
डॉ. जसबीर सिंह
डॉ. मेघा शर्मा
डॉ. नवप्रीत
डॉ. निकिता शर्मा
डॉ. प्रीति अग्रवाल
डॉ. तरुण शर्मा

निम्नलिखित संस्थानों के शोधकर्ताओं को सम्मिलित करने वाला बहु-केंद्रीय अध्ययन:

  • पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़
  • आईजीएमसी, शिमला
  • डीआरपीजीएमसी, टांडा
  • एसएलबीएस, मंडी
  • डीएमसी, लुधियाना
  • आईसीएमआर-एनआईई, चेन्नई
  • आईसीएमआर राष्ट्रीय स्तर समन्वयक
  • राज्य निगरानी अधिकारी
आईसीएमआर-डीएचआर प्रगति पर
3 हिमाचल प्रदेश के एक तृतीयक देखभाल अस्पताल में स्क्रब टाइफस एवं अन्य रिकेट्सियल संक्रमणों का आणविक लक्षण-वर्णन डॉ. मेघा शर्मा डॉ. प्रीति अग्रवाल
डॉ. पुनीत कुमार गुप्ता
डॉ. तरुण शर्मा
डॉ. श्रीराम
सामान्य चिकित्सा विभाग आरवीआरडीएल (आईसीएमआर-डीएचआर) के अंतर्गत प्रगति पर
4 अस्पताल अपशिष्ट जल निगरानी के माध्यम से आईसीएमआर वीआरडीएल केंद्रों में एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध (AMR) की निगरानी एवं स्वदेशी AMR पहचान परीक्षणों का अनुकूलन डॉ. प्रीति अग्रवाल डॉ. पुनीत कुमार गुप्ता
डॉ. मेघा शर्मा
भारत भर के विभिन्न वीआरडीएल केंद्रों के शोधकर्ताओं को सम्मिलित करने वाला बहु-केंद्रीय अध्ययन। आईसीएमआर-डीएचआर प्रगति पर
5 डेंगू की तीव्र पहचान एवं सीरोटाइप निर्धारण हेतु RNA निष्कर्षण-मुक्त एक-चरणीय मल्टीप्लेक्स रियल-टाइम RT-PCR आधारित प्रोटोकॉल का विकास डॉ. पुनीत कुमार गुप्ता डॉ. प्रीति अग्रवाल
डॉ. मेघा शर्मा
डॉ. सुमेधा शर्मा
डॉ. विभा मेहता
डॉ. तरुण शर्मा
डॉ. कपिल शर्मा
सामान्य चिकित्सा विभाग के सहयोग से आरवीआरडीएल (आईसीएमआर-डीएचआर) के अंतर्गत ISAC द्वारा अनुमोदित, IEC अनुमोदन अपेक्षित

* इन बहु-केंद्रीय अध्ययनों में एम्स बिलासपुर के शोधकर्ताओं को सम्मिलित किया गया है।

विस्तार योजना

उन्नत नैदानिक, निगरानी (Surveillance) एवं अनुसंधान क्षमताओं को सुदृढ़ करने हेतु बीएसएल-3 (BSL-3) तथा एनिमल बीएसएल-3 सुविधाओं सहित एक स्वतंत्र क्षेत्रीय वीआरडीएल (Regional VRDL) भवन के निर्माण की योजना प्रस्तावित है।

क्र. सं. सहयोग हेतु विभाग एवं संस्थान के साथ सहयोग सहयोग के अंतर्गत प्रदान की जाने वाली सेवाएँ / प्रगतिरत कार्य
1 अस्पताल संक्रमण रोकथाम एवं नियंत्रण सभी हितधारक एवं नैदानिक विभाग निगरानी गतिविधियाँ, एंटीबायोग्राम तैयार करना तथा एंटीमाइक्रोबियल स्टूअर्डशिप प्रोग्राम (AMSP) का संचालन।
2 उन्नत आणविक नैदानिक सुविधाएँ सभी नैदानिक विभाग आणविक परीक्षण एवं अनुक्रमण (Sequencing) सुविधाओं हेतु सिंड्रोमिक पैनल।
3 माइकोबैक्टीरियोलॉजी (टीबी प्रयोगशाला) के अंतर्गत संवेदनशीलता परीक्षण सहित माइकोबैक्टीरियल रोगजनकों की उन्नत आणविक जाँच सभी नैदानिक विभाग राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के अंतर्गत CBNAAT परीक्षण एवं स्टेनिंग सेवाएँ।
4 यौन संचारित संक्रमणों के लिए नैदानिक सेवाएँ आवश्यकता अनुसार विभिन्न विभाग, विशेषकर प्रसूति एवं स्त्री रोग, यूरोलॉजी तथा त्वचा रोग विभाग यौन संचारित संक्रमणों के लिए नैदानिक सूक्ष्मजैविकी सेवाओं का विस्तार।
5 प्रतिरक्षात्मक मापदंडों सहित सीरोलॉजिकल सेवाओं का विस्तार आवश्यकता अनुसार संस्थान के विभिन्न विभाग, विशेषकर सामान्य चिकित्सा, त्वचा रोग एवं पल्मोनरी मेडिसिन विभाग CRP, एलर्जी पैनल, TNF-अल्फा तथा विभिन्न एंटीबॉडी-आधारित जाँचों की सुविधा।
6 उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगजनक एवं "वन हेल्थ" पहल विभिन्न नैदानिक विभाग एवं संबद्ध क्षेत्र, जिनमें पशुपालन, मत्स्य पालन, कृषि, वन एवं वन्यजीव विभाग शामिल हैं उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों एवं "वन हेल्थ" कार्यक्रमों से संबंधित संयुक्त निगरानी, अनुसंधान एवं नैदानिक गतिविधियाँ।